नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की: कृष्ण मंदिरों में सजी झांकियां, वृंदावन से आए वस्त्र, 1008 तुलसी दलों से अभिषेक


जोधपुर33 मिनट पहले

गंगश्याम मंदिर।

जोधपुर के कृष्ण मंदिरों में झांकियां सज गई है। मंदिरों में झांकियों के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। मंदिरों के बाहर लम्बी कतारों में खड़े लोग दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आ रहे है। जोधपुर के मुख्य कृष्ण मंदिर गंगश्याम जी, कुंज बिहारी जी, रातानाडा कृष्ण मंदिर, दाऊजी मंदिर व चौपासनी श्याम मनोहर मंदिर में भारी भीड़ है। मंदिरों में विशेष श्रृंगार व झांकियों से सजे नजर आ रहे है। रात 12 बजे मंदिरों में कृष्ण जन्मोत्सव व मुख्य आरती के बाद प्रसादी वितरण कार्यक्रम आयोजित होगा।

कुंज बिहारी मंदिर में सजी प्रतिमा।

जोधपुर के इस्कॉन मंदिर में वृंदावन से विशेष पौशाक बन कर आई है जिसे कृष्ण की प्रतिमा को पहनाई गई है। मंदिर विशेष फूलों से सजाया गया है। पुजारी सुंदरलाल दास ने बताया कि भ्गवान को 1008 तुलसीदलों व पंचगव्यों से अभिषेक किया गया। रात्री 12 बजे 56 भोग व महाआरती आयोजित होगी।

232 साल प्राचीन है कुंजबिहारीजी का मंदिर

कुंज बिहारी मंदिर के पुजारी रिंकु महाराज ने बताया कि पंचामृत से अभिषेक के बाद रात्री 12:30 पर महाआरती व प्रसाद वितरण किया जाएगा। भगवान को केसरिया वस्त्रों पहनाए गए है और ऋतु पुष्पों से श्रृंगार किया गया है।

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पुष्टिमार्गीय परम्परा से जुड़ा शहर का सर्वाधिक ख्यातनाम कुंजबिहारीजी का मंदिर 232 साल प्राचीन है। विक्रम संवत 1847 (सन् 1790) में जोधपुर के तत्कालीन महाराजा विजयसिंह की पासवान (उप पत्नी) गुलाब राय ने कुंज बिहारी मंदिर बनवाया था। देवस्थान विभाग की ओर से प्रबंधित इस मंदिर में जन्माष्टमी को ठाकुरजी का विशेष शृंगार, अभिषेक होता है और झांकियां सजाई जाती हैं। राधाष्टमी पर्व की छठा निराली होती है। मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर नाथद्वारा चित्रशैली के अनूठे कलात्मक भित्ति बने हैं। प्राकृतिक रंगों से बने चित्रों में देवकी-वासुदेव विवाह, कृष्ण रास प्रसंग, गीता उपदेश, कृष्ण-सुदामा सखा भाव, गजेन्द्र मोक्ष आदि भागवत प्रसंग बखूबी दीवारों पर उकेरे हुए हैं। मंदिर के महंत भंवरदास निंरजनी ने बताया कि मंदिर में मुख्य स्वरूप श्रीनाथजी का है। कहा जाता है कि कुंज बिहारी की प्रतिमा कबूतरों का चौक स्थित सीताराम मंदिर से लाकर स्थापित की गई थी। मंदिर का विशाल शिखर एवं तोरणद्वार स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने हैं। तोरणद्वार की विशेषता है कि एक ही शिलाखंड को तराश कर बनाया गया है।

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