रामगढ़ बाघ अभ्यारण में खनन समेत कई गतिविधियों पर रोक, चंबल नदी का कुछ हिस्सा भी रिजर्व घोषित


Bundi Ramgarh Tiger Reserve: राजस्थान (Rajasthan) के बूंदी (Bundi) में प्रदेश के चौथे टाइगर रिजर्व बने रामगढ़ टाइगर रिजर्व (Ramgarh Tiger Reserve) में खनन समेत कई गतिविधियों पर रोक लगा दी गई. राज्य सरकार ने कोटा (Kota) और बूंदी से गुजर रही चंबल नदी का कुछ हिस्सा भी रामगढ़ अभ्यारण ने के हिस्से में रिजर्व घोषित कर दिया. चंबल नदी के दोनों किनारों पर 1 किलोमीटर दूर तक का क्षेत्र क्रिटिकल टाइगर हैबिट्स ठाट एरिया माना गया. विभाग ने करीब 256 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का हिस्सा रामगढ़ टाइगर रिजर्व में शामिल कर दिया.

वर्तमान में यह हिस्सा राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य का था जिसे अब टाइगर रिजर्व का कोर एरिया घोषित होने के बाद अब इसका क्षेत्र सीमा से 1 किलोमीटर आगे तक इको सेंसेटिव जोन रहेगा. यहां खनन, व्यवसायिक गतिविधियां, औद्योगिक सहित कई गतिविधियां बिना अनुमति प्रतिबंध रहेगी. रामगढ़-मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के बीच बाघों के विचरण के लिए कॉरिडोर का काम करेगा. वर्तमान में यह क्षेत्र केशोरायपाटन और इटावा वन रेंज में आता है. 

कोटा और बूंदी जिले के ये इलाके हैं शामिल

टाइगर रिजर्व में चम्बल का 256.28 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल किया गया. इसमें कोटा जिले के चंद्रावला, नीमोदा हरिजी, छीपरदा, बलदेवपुरा, सुल्तानपुर, झोटोली, मण्डावरा, पीपल्दा साण्ड को शामिल किया गया. इसके अलावा नरसिंहपुरा, नोनेरा, गेंता, पाडा नीमसरा, सीनोता, ढीबरी चम्बल, पीपल्दा समेल और घघटाना को शामिल किया गया. बूंदी के रोटेदा, पाली बसवाड़ा, जगदरी, गोहाटा, बलदेवपुरा, डोलर, बालोद, पीपल्दा, कोटाखुर्द, बहडावली, माखीदा और ढीकोली के इलाकों को शामिल किया गया.

रुकेगा अवैध खनन, लेकिन दावा हवा हवाई

वन विभाग ने चम्बल नदी के किनारों को राष्ट्रीय घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र घोषित कर रखा है लेकिन बूंदी जिले में चम्बल नदी से बड़ी मात्रा में बजरी का अवैध खनन चल रहा है. डीसीएफ संजीव शर्मा ने बताया कि अब टाइगर रिजर्व घोषित होने से यहां खनन और अन्य प्रतिबंधित कार्यों पर रोक लगेगी. साथ ही यहां नया इको सिस्टम भी विकसित होगा. इससे चम्बल नदी को भी संरक्षण मिलेगा. यहां वानिकी गतिविधियां बढ़ेगी. चम्बल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र को टाइगर रिजर्व में शामिल करने का निर्णय सराहनीय है. इसके बनने से अब धौलपुर से लेकर कुम्भलगढ़ तक बाघों के लिए कॉरिडोर तैयार होगा. यह बाघों का सदियों पुराना वनमार्ग माना जाता रहा है. चम्बल नदी में प्रदूषण पर भी रोक लगेगी.

इस क्षेत्र में बाघों का आवागमन होता रहता है

वन विभाग ने रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निर्धारण के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था. इस समिति ने पिछले दिनों टाइगर रिजर्व क्षेत्र में राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र को भी शामिल कर लिया. इसके पीछे यह कारण माना गया कि पहले इस क्षेत्र में बाघों का आवागमन होता रहा है. वर्ष 2007 में बाघिन टी-35 चम्बल के किनारे होते हुए ही सुल्तानपुर के जंगल में पहुंची थी. रणथम्भौर से ही बाघ टी-98 भी चम्बल के रास्ते होते हुए मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में पहुंचा था जिसे एमटी-4 नाम दिया गया. इसके अलावा कुछ समय तक बाघ टी-110 भी चम्बल के आसपास के क्षेत्र में रहा था.

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